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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,



ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
खो जाऊ ऐसी दुनिया में जहा ना हो कभी कल ,
दिल ढूँढता हे बस यही पल !
ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
चलता जाऊ इतनी दूर कोई कारवा ना हो !
ख्वाबो के शहर में कोई सपना ना हो ,
बन जाये ऐसी तक़दीर नज़र ना आये किसी की तस्वीर !
अमन से रह सकू , ना हो गुनाहों की ज़ंजीर ,
ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
दुनिया ढूँढती रहे मेरा पैगाम ,
आये ना वहा कभी कोई शाम !
जी सके चैन से बची ज़िन्दगी ,
वहा कोई ना हो बदनाम !



♥♪♥OM KASHYAP ♥♪♥:



36 टिप्‍पणियां:

  1. दिल ढूँढता हे बस यही पल !
    दिल को हमेशा ही ऐसे पल की तलाश रहती है ...बहुत खूब लिखा है कश्यप भाई

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  2. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।
    कश्यप भाई तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  3. ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ......कितनी प्यारी मासूम सी ख्वाहिश ..

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  4. वाह ओम भाई वाह
    बहुत अच्छी कविता लिखी है
    शुभकामनाये

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  5. यदि आपका दिल किसी ऐसी जगह का पता बता दे तो मुझे भी बताना मै भी चलूगंा आपके साथ

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  6. सुन्दर सपनों का सुन्दर गीत !
    खूबसूरत अभिव्यक्ति कर साथ !

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  7. सुंदर सपना, शुभकामनाएं.

    रामराम

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  8. ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
    खो जाऊ ऐसी दुनिया में जहा ना हो कभी कल
    बहुत खूबसूरत है आपके सपनो की दुनिया.. सुन्दर रचना...

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  9. अय मेरे दिल कहीं और चल
    गम की दुनिया से दिल भर गया
    ढूंढ दे अब कोई घर नया .......

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  10. जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
    खो जाऊ ऐसी दुनिया में जहा ना हो कभी कल

    बहुत खूब .... ऐसे पलों की दरकार शायद कभी ना कभी सभी को होती है..... सुंदर लिखा आपने....

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  11. SANJAY JI
    ZEAL JI
    DEEPAK JI
    GYANCHAND JI
    OR SURENDRA JI
    AAP SABHI KA AABHAR
    DHANAYYWAD

    उत्तर देंहटाएं
  12. TAU JI
    DIPTI JI
    SANDHYA JI
    HARKIRAT JI
    OR
    DR.MONIKA JI
    AAP SABHI KA AABHAR
    DHANAYYWAD

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  13. चलता जाऊ इतनी दूर कोई कारवा ना हो !
    ख्वाबो के शहर में कोई सपना ना हो

    ये लाइन एक दम सच्ची सी लगी, अच्छे भाव समेटे बढ़िया रचना .


    नारी स्वतंत्रता के मायने

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  14. बहुत खूब, बहुत अच्छी रचना।

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  15. वो गीत याद आ गया ....
    ए मेरे दि‍ल कहीं और चल गमी की दुनि‍यां से जी भर गया...

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  16. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (26.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  17. charcha manch par chune jane ke liye ....bahut bahut badhi kashyap bhai

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  18. MITHILESH JI
    PARSHURAM JI
    RAJEY JI
    ER. SATYAM JI
    OR
    SANJAY JI
    AAP SABHI KA AABHAR
    BAHUT BAHUT DHANAYWAD

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  19. अच्‍छी रचना। खूबसूरत अभिव्‍यक्ति

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  20. बहुत ही उम्दा नज़्म.

    चल बुल्लिया चल ओत्थे चलिए जित्थे सारे अन्ने
    न कोई साडी ज़ात पछाने न कोइ सानूं मन्ने .

    सलाम.
    अन्ने-अंधे ,मन्ने-माने

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  21. खूबसूरत अभिव्‍यक्ति ....... बधाई.

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  22. ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
    बहुत खूब, पर क्या सपनो के अलावा ऐसी कोई जगह होती होगी...

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  23. @ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    दुनिया ढूँढती रहे मेरा पैगाम ,
    आये ना वहा कभी कोई शाम !
    जी सके चैन से बची ज़िन्दगी ,
    वहा कोई ना हो बदनाम
    काश ऐसी जगह दुनिया में होती तो मै भी वहां के लिए सीट बुक करवाता
    बहूत खुबसूरत प्यारी सी रचना
    हार्दिक शुभकामनाएं!हम

    उत्तर देंहटाएं
  24. @ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    दुनिया ढूँढती रहे मेरा पैगाम ,
    आये ना वहा कभी कोई शाम !
    जी सके चैन से बची ज़िन्दगी ,
    वहा कोई ना हो बदनाम
    काश ऐसी जगह दुनिया में होती तो मै भी वहां के लिए सीट बुक करवाता
    बहूत खुबसूरत प्यारी सी रचना
    हार्दिक शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  25. अमन से रह सकू , ना हो गुनाहों की ज़ंजीर ,
    ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    दुनिया ढूँढती रहे मेरा पैगाम ,
    आये ना वहा कभी कोई शाम !

    मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।

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  26. बहुत खूब, बहुत अच्छी रचना। बधाई।

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  27. काश ऐसी कोई जगह होती ...बहुत सुन्दर भाव

    उत्तर देंहटाएं
  28. खूबसूरत अभिव्‍यक्ति ....... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  29. Atul Shrivastava ने कहा…
    अच्‍छी रचना। खूबसूरत अभिव्‍यक्ति

    @sagebob ने कहा…
    बहुत ही उम्दा नज़्म.

    चल बुल्लिया चल ओत्थे चलिए जित्थे सारे अन्ने
    न कोई साडी ज़ात पछाने न कोइ सानूं मन्ने .

    सलाम.
    अन्ने-अंधे ,मन्ने-माने

    @Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…
    खूबसूरत अभिव्‍यक्ति ....... बधाई.

    @ उदगार ने कहा…
    ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
    जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
    बहुत खूब, पर क्या सपनो के अलावा ऐसी कोई जगह होती होगी...

    @ madansharma ने कहा…
    काश ऐसी जगह दुनिया में होती तो मै भी वहां के लिए सीट बुक करवाता
    बहूत खुबसूरत प्यारी सी रचना
    हार्दिक शुभकामनाएं!.


    AAP SABHI KA AABHAR
    BAHUT BAHUT DHANAYWAD

    उत्तर देंहटाएं
  30. @ Dr Varsha Singh ने कहा…
    मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।

    @Patali-The-Village ने कहा…
    बहुत खूब, बहुत अच्छी रचना। बधाई

    @ संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
    काश ऐसी कोई जगह होती ...बहुत सुन्दर भाव


    @Sunil Kumar ने कहा…
    खूबसूरत अभिव्‍यक्ति ....... बधा


    @amit-nivedita ने कहा…
    amen..


    AAP SABHI KA AABHAR
    BAHUT BAHUT DHANAYWAD

    उत्तर देंहटाएं
  31. ओम कश्यप जी, बड़ी सुंदर और मार्मिक अभिव्यक्ति है आपकी। परंतु आपकी रचना को पढ़कर प्रसाद की वे पंक्तियां ( ले चल मुझे भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे-धीरे) याद आ गईं जिनके कारण उन पर आरोप लगा था कि वे पलायनवादी हैं। आपके गीत में ऐसी जगह जाने की ख्वाहिश की गई है जहां यादों का आंचल न हो अर्थात मानव स्वभाव ही लुप्त हो जाय, जहां कोई सपना न हो अर्थात पूर्णप्राप्ति हो जाए, जहां कोई आने वाला कल न हो, अर्थात समय ठहर जाए, जहां कोई कारवां न हो अर्थात एकाकीपन हो, जहां किसी की तस्वीर नजर न आए अर्थात वीरानापन हो। समझ में नहीं आया कि ऐसी जगह कोई बची ज़िन्दगी चैन से कैसे काट सकता है? महादेवी वर्मा की पंक्तियां याद आ रहीं है जिनमें उन्होंने व्यक्त करना चाहा है कि जीवन्तता तो परिवर्तन में ही है -
    वे मुस्काते फूल, नहीं आता है जिनको मुरझाना।
    वे तारों के दीप, नहीं भाता है जिनको बुझ जाना। .................

    आपकी ये पंक्तियां बहुत ही अच्छी लगीं - ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह ले चल, जहां अपना पराया न हो।
    इन पंक्तियों के साथ अपनी बात पूरी करता हूं कि-
    जाने कि ज़िद छोड़ दें जाएं कहीं नहीं
    जाएंगे तो अपनों को पाएंगे कहीं नहीं
    अमन और प्यार का लहराए हम परचम
    स्वर्ग सी धरती बना के रख दें हम यहीं।

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