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बुधवार, 2 मार्च 2011

गावँ की यादें ... ओम कश्यप










गाँव चारों और
प्रकृति की छाँव ,
देखकर जिसको मचल जाता हे मन !
हवा ऐसी बहती तन भी रहता प्रसन्न ,
सुबह -सुबह को हसीं नज़ारा ,
ध्यान से जो निहारा !
अजब सी मस्ती पंछियों का गाना ,
ऐसा गाँव हमारा ,
वो हसीं वादियाँ और वो खुला आसमान !
फूलों की खुशबु झरनों की छन-छन ,
कोयल की को कु -कु-कु बुलबुल का गान !
यहाँ हर कोई करता हे बड़ों का सम्मान ,
गाँव चारों और प्रकृति की छाँव ,
जहा भी ये महान हैं जाते !
हर क्षेत्र में पहचान बनाते ,
मेहनत से नहीं ये घबराते !
गैरों को भी अपना बनाते ,
सब के दिलो में बस जाते !
खेतों में खून की तरह पसीना बहाते ,
धरती माँ से अन्न उगाते !
गाँव चारों और प्रकृति की छाँव ,
परवाह न करते गर्मी-सर्दी की
आये चाहे लाखों तूफ़ान ,
मेहनत सिर्फ मेहनत करना हैं इनकी शान !
वाह रे गाँव के वीरों कैसे करे तुम्हारा गुणगान ,
गांवो से ही बनता मेरा भारत महान !!




चित्र :-
( गूगल से साभार )

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति, आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छे! एक पेंटिंग बना दी आपने!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी लगी ये भावमयी प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सारग्र्भित और भावप्रवण रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. गाँव तो गाँव होता है ..जहाँ पर घर बेशक अलग होते हैं लेकिन भावनात्मक रूप से लोग एक दुसरे से गहरे रूप से जुड़े होते हैं ...!
    आशमान ...आसमान ....
    वुल्बुल...बुलबुल को इस तरह लिखें

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी रचना के शब्दों ने गाँव की यादों को जीवंत कर दिया..... बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुंदर ...आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  8. अच्छी प्रस्तुति ! हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  9. yaad aa gayi school time ki jab kuch doston ke saath bhaag ke gaaon mein jaa kar, tubewell mein nahaate thay...garm garm kolhu se gurh khaate thay, taaza karaane ke liye shukriyaa!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. मेरी स्‍मृति का गांव ऐसा ही कुछ है, लेकिन आज भी ऐसा होगा, शंकालु मन आश्‍वस्‍त नहीं हो पाता है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. @अरविन्द जांगिड ने कहा…
    बहुत ही अच्छी प्रस्तुति, आभार.

    @चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…
    बहुत अच्छे! एक पेंटिंग बना दी आपने!!


    @ZEAL ने कहा…
    अच्छी लगी ये भावमयी प्रस्तुति ।


    @ताऊ रामपुरिया ने कहा…
    बहुत ही सारग्र्भित और भावप्रवण रचना, शुभकामनाएं.
    रामराम.


    @केवल राम : ने कहा… गाँव तो गाँव होता है ..जहाँ पर घर बेशक अलग होते हैं लेकिन भावनात्मक रूप से लोग एक दुसरे से गहरे रूप से जुड़े होते हैं ...!

    @Deepak Saini ने कहा… om bhai
    sundar kavita ke liye badhai

    AAP SABHI KA BAHUT BAHUT DHANYWAAD
    AABHAR
    KRPYA MARGDARSHAN KARTE RAHIYE

    उत्तर देंहटाएं
  13. @डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…
    आपकी रचना के शब्दों ने गाँव की यादों को जीवंत कर दिया..... बहुत सुंदर

    @चैतन्य शर्मा ने कहा…
    सुंदर ...आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं

    @सतीश सक्सेना ने कहा…
    अच्छी प्रस्तुति ! हार्दिक शुभकामनायें !

    @सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…
    yaad aa gayi school time ki jab kuch doston ke saath bhaag ke gaaon mein jaa kar, tubewell mein nahaate thay...garm garm kolhu se gurh khaate thay, taaza karaane ke liye shukriyaa!!

    @amit-nivedita ने कहा…
    mera bharat mahan...

    @Rahul Singh ने कहा…
    मेरी स्‍मृति का गांव ऐसा ही कुछ है, लेकिन आज भी ऐसा होगा, शंकालु मन आश्‍वस्‍त नहीं हो पाता है.

    AAP SABHI KA BAHUT BAHUT DHANYWAAD
    AABHAR
    KRPYA MARGDARSHAN KARTE RAHIYE

    उत्तर देंहटाएं
  14. wow ... bouth he aacha post kiya hai aapne dear

    Visit plz Friends.....
    Lyrics Mantra
    Music Bol

    उत्तर देंहटाएं
  15. गाँव की याद ताज़ा करवा दी आपने.
    सलाम.

    उत्तर देंहटाएं
  16. प्रिय बंधुवर ओम कश्यप जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    वाह ! बहुत मनभावन लिखते हैं आप तो …

    वो हसीं वादियां और वो खुला आसमान !
    फूलों की खुशबु झरनों की छन-छन ,
    कोयल की को कु -कु-कु , बुलबुल का गान !
    यहां हर कोई करता हे बड़ों का सम्मान ,
    गांव चारों और प्रकृति की छांव ,

    गांव का पूरा चित्रण इतना प्यारा है कि जी करता है कि आपके गांव आ'कर इस स्वर्गीय सुख - आनन्द के बीच आपके साथ दो - चार दिन बिताने ही चाहिए … :)

    सुंदर रचना के लिए आभार और बधाई !

    ♥ हार्दिक शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !♥
    - राजेन्द्र स्वर्णका

    उत्तर देंहटाएं
  17. गाँव की याद ताज़ा करवा दी आपने.
    गांव का पूरा चित्रण इतना प्यारा है कि जी करता है कि आपके गांव आ'कर इस स्वर्गीय सुख - आनन्द के बीच आपके साथ दो - चार दिन बिताने ही चाहिए … :)

    सुंदर रचना के लिए आभार और बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  18. गाँव की याद ताज़ा करवा दी आपने| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  19. अच्छी प्रस्तुति ।
    काश शहर भी गांव जैसे हो जाते !

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  20. AAP SABHI KA BAHUT BAHUT DHANYWAAD
    AABHAR
    KRPYA MARGDARSHAN KARTE RAHIYE

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  21. गाँव की यादों को जीवंत कर दिया..... बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं