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रविवार, 6 मार्च 2011

सिगरेट की जलन ... ओम कश्यप





सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
इसके शोखीनो से पुछो ये उनके गमो को मिटाती है !
कोई पीता है गम में तो कोई पीता फेशन में ,
वक़्त कुछ भी हो पीते हैं हर मौसम में !
परवाह न करते ये किसी बिमारी की ,
चाहे रकम लेनी पड़ जाये उधारी की !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
देखो यारो सिगरेट पीने वाले ऐसे भी होते ,
माचिस , बीडी पीने वालों से मांगकर सिगरेट पीते !
पुछो इन नशे के दलालों से ,
कैसे गुजरते है इन हालातो से !
खुद हो जाते है बेखबर ,
नहीं रहती रिश्ते-नातो की खबर !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है
कुछ तो यारों ऐसे भी बदनसीब होते ,
जो छिपकर पखाने में भी पीते !
वाह रे चलाने वालो खूब चलाओ ये कारोबार ,
होने वाले तो होते ही जायेंगे बीमार !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
इसके शोखीनो से पुछो ये उनके गमो को मिटाती है !

चित्र :-
( गूगल से साभार )

31 टिप्‍पणियां:

  1. सिगरेट के बारे में कहा जाता है कि
    इसके एक ओर आग और धुआँ होता है और दूसरी ओर एक बेवकूफ!

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  2. सिगरेट अपने साथ-साथ और कई लोगों को नुकसान पहुंचाती है ।

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  3. सुन्दर पोस्ट |बधाई

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  4. om ji
    kya baat hai! peene v pilane walo dono ko hi badi
    khoob surati ke sath sahi rasta dikhdiya .bas ab yehi manaiye kivo is nashha -khori ki aadat se mukt ho jaaye .kyon ki aise logo ki bhi kami nahi jo ghar -baar bech kar bhi apna nasha pura karne se chukate nahi hain.bahut hi prabhav -shali prastuti .
    aabhar sahit
    poonam

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  5. यार हम तो चेन स्मोकर है हमारा क्या होगा?
    इतना कहना चाहूँगा
    हर फिक्र को धुवे मे उडाता चला गया .................

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  6. खूबसूरत ब्लॉग और प्रभावित करने वाली पोस्ट

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  7. सम्मानित ब्लोगर बन्धु, ब्लोगिंग के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें... "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" हिंदी ब्लोगरो में प्रेम, भाईचारा, आपसी सौहार्द, के साथ हिंदी ब्लोगिंग को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित है.....यह ब्लॉग विश्व के हर कोने में रहने वाले भारतियों का स्वागत करता है. आपसे अनुरोध है की आप इस "मंच" के "अनुसरणकर्ता" {followers} बनकर योगदान करें. मौजूदा समय में यह मंच लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया है. जिसमे आप भी भाग ले सकते है.
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  8. परवाह न करते ये किसी बिमारी की ,
    चाहे रकम लेनी पड़ जाये उधारी की !

    बीमारी की तो छोडिये मौत की भी परवाह नहीं करते ....
    हमारे यहाँ एक दारु के पियक्कड़ थे ....अंतिम चेतावनी पर भी पीते रहे ....
    अब बीवी बच्चों को छोड़ खुद चल बसे ....
    पीछे बीवी बच्चे परेशान ...
    जो था इलाज में खर्च कर दिया .....

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  9. व्यंगात्मक लहजे में लिखी रचना सच्छाई को बयान करती है ... बहुत लाजवाब लिखा है ...

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  10. अच्छा व्यंग्य है ओम जी!! मगर ज़िंदगी की सिगरेट का क्या, जबतक ख़त्म नहीं होती, धुँआती रहती है!अच्छी सचेत करती रचना!!

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  11. आगाह करती कविता, इससे सिर्फ पीने वालों को ही नहीं,न पीने वालों को ज़्यादा नुक़सान होता है!!

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  12. bahut khoob join me
    www.architpandit.blogspot.com

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  13. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  14. आपने अच्छा लिखा है अगर आप खुद भी पीते हैं तो सचेत करती हुई अपनी रचना से कुछ सीखिए और छोड़ दीजिए...
    कुछ वर्तनी की गलतियां हैं...जरूर देख लीजिएगा...
    पीने वालों से न पीने वालों को भी नुकसान है...

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  15. सही सीख और शिक्षा देती हुई सिगरेट पर पठनीय पोस्ट.

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  16. प्रिय बंधुवर ओम कश्यप जी
    सस्नेहाभिवादन !

    आपने अच्छा संदेश दिया है रचना के माध्यम से …
    बधाई और आभार !

    शुक्र है भगवान का , हम हर नशे से दूर हैं !
    इसलिए कितनों की नज़रों के बने हम नूर हैं !!
    :)



    हार्दिक बधाई !

    मंगलकामनाएं !!

    ♥होली की अग्रिम शुभकामनाएं !!!♥


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  17. wah kya khub andaz n kisi ka dil dukhaya or pyaara sa sandesh bhi de dala .
    bahut khub andaz

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  18. अच्छा व्यंग्य है ओम जी!
    बहुत लाजवाब लिखा है

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  19. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  20. बहुत लाजवाब व्यंग्य लिखा है|धन्यवाद|

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  21. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद ...
    आपके प्यार को पाकर दिल भर आया ,
    जहा भी गया चैन से रह नहीं पाया .
    इसलिए यही पर फिर आया ...

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  22. दोस्तों ब्लॉग पर अनियमितता होने के कारण आप सभी से माफ़ी चाहता हूँ ..

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  23. यह सिगरेट का धुआं ..सबके लिए अलग - अलग मायने रखता है ...सबको सिगरेट में एक नया संसार नजर आता है ..लेकिन इसका सेवन किसी भी तरीके से सही नहीं है ..आपका शुक्रिया इस सार्थक रचना के लिए

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  24. शुक्रिया इस सार्थक रचना के लिए

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