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रविवार, 27 फ़रवरी 2011

वक़्त की रफ़्तार ... ओम कश्यप.








चित्र :-
( गूगल से साभार )

वक़्त की रफ़्तार चलती ही रहेगी ,

चाहे कर लोचिजितनी भी तकरार !

कभी अपनों का बिछुड़ना, कभी गेरों का प्यार ,

किसी का जाना तो किसी का इंतज़ार !

चलती ही रहेगी वक़्त की रफ़्तार ,

गमो का सागर हो या खुशियों की बोछार !

चाहे जितनी भी तेज़ हो रफ़्तार ,

सपनो की दुनिया हो या हकीकत का संसार !

गम-ऐ-ज़िन्दगी हो या यादों का संसार ,

चलती ही रहेगी वक़्त की रफ़्तार ,

कही सास-बहु के झगडे कही पर तकरार !

अजीब हे ये मंजर गहराई का समंदर ,

कोई है बाहर तो कोई है अन्दर !

आना -जाना लगा है लगा ही रहेगा ,

वक़्त का पहिया चलता ही रहेगा !

सोच-समझकर गलत न करो जान बुझकर ,

सब को पता है गलत करते आँख मूंदकर !

फिर न जाने कितने बन जाते है स्टार ,

वाह री वक़्त की रफ़्तार !

वाह री वक़्त की रफ़्तार !!

वक़्त के बारे में लिखना है सूरज को दिया दिखाना है !

वक़्त की रफ़्तार और मार को हर किसी ने माना है!!


गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,



ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
जहा अपना-पराया ना हो , ना हो यादों का आँचल !
खो जाऊ ऐसी दुनिया में जहा ना हो कभी कल ,
दिल ढूँढता हे बस यही पल !
ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
चलता जाऊ इतनी दूर कोई कारवा ना हो !
ख्वाबो के शहर में कोई सपना ना हो ,
बन जाये ऐसी तक़दीर नज़र ना आये किसी की तस्वीर !
अमन से रह सकू , ना हो गुनाहों की ज़ंजीर ,
ऐ मेरे दिल मुझे ऐसी जगह लेकर चल ,
दुनिया ढूँढती रहे मेरा पैगाम ,
आये ना वहा कभी कोई शाम !
जी सके चैन से बची ज़िन्दगी ,
वहा कोई ना हो बदनाम !



♥♪♥OM KASHYAP ♥♪♥:



सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

आपकी ये नज़र...... ओम कश्यप.




ऐ हसीना आपकी ये नज़र ,

कर गयी हमको बेखबर !
हुआ हम पर ये कैसा असर ,
अपना पता हे ना ज़हा की खबर !
ऐ हसीना आपकी ये नज़र ,
गालों पर हे कुछ लकीरे !
आखों में हे आंसू ,
आये ना अब हमको कुछ भी नज़र !
ऐ हसीना आपकी ये नज़र ,
कर गयी हमको बेखबर !
बीच भवर में हे कश्ती ,
किनारा आये ना नज़र !
अब तुम ही बताओ जाये हम किस डगर ,
ऐ हसीना आपकी ये नज़र ,
कर गयी हमको बेखबर !
आँखों में हे नींदें , नींदों में सपने ,
सपनो में हे आपकी नज़र !
अब तो आकर मिल जाओ डिअर ,
मिल जाये थोडा सुकून आ जाये सबर !
जादू सा कर गयी क्या तुम हो जादूगर ,
रातों का पता नहीं हुई ना दिन की खबर !
चले थे हम भी कभी संभल-संभल कर ,
अब पता चला बिजली सी गिरी रह गए याद बनकर !
ऐ बेखबर आपकी ये नज़र ,
कर गयी ऐसा असर !
हो गए हम बेखबर !!





बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

"विज्ञापन " न ही मेरा मन न ही मेरा तन ,......ओम कश्यप.




"विज्ञापन " न ही मेरा मन न ही मेरा तन ,
ऐसी हे मेरी पहचान व्यापार में डाल दूँ जान !
आओ बताऊ अपने बारे मे ,
वादे करता ढेरो सारे मे !
मुझे बनाने वाले हैं बहुत महान ,
कैसे करू उनका बखान !
आओ देखो आज का जमाना ,
हर किसी ने लोहा मेरा माना !
हर जगह हर स्थान पर में देखा जाऊ ,
अपने बारे में और ज्यादा क्या बताऊ !
कभी-कभी तो मे हो जाता इतना हिट ,
बन जाता हूँ बहुत फेवरिट !
नित्य नवीन रूप बनाया ,
सब ने मुझे अपनाया !
कभी तो दुःख मुझे भी आया ,
जब में कार्यक्रम के बीच में आया !
बटन दबा आपने दूसरा चेनल लगाया ,
मैंने नहीं किसी का दिल दुखाया !
सब फुले-फले यही सन्देश सुनाया ,
अंत में दोस्तों यही कहूँगा !
में होता अत्यन्त ही छोटा ,
मैंने हर किसी के लिए धन लूटा !
मैंने हर किसी के लिए धन लूटा !!


रविवार, 13 फ़रवरी 2011

"मोबाइल " एक स्टाइल , .....ओम कश्यप


´¨`':.ﻶﻉ.:' ´¨`ΞΞΞΞΞΞΞ´ ¨`':.ﻶﻉ.:' ´¨`

"मोबाइल " जिसके हाथ में हे देखो उसका स्टाइल ,

अजब इनका नखरा गजब इनकी शान !
अब देखो मोबाइल की पहचान ,
संगीत यंत्रों की ले ली हे जान !
बनने लगा यहाँ वीडियो-कम- कैमरा ,
फोटो ग्राफर कहे कम हो गया व्यापार मेरा !
अब शुरू हो गया बहुत बड़ा वार ,
टी.वी. और कंप्यूटर पर भी किया अत्याचार !
"मोबाइल " जिसके हाथ में हे देखो उसका स्टाइल ,
२ जी में हो गया देश का सर्वोच्च घोटाला !
बाज़ार में अब हे ३ जी का बोलबाला ,
आओ देखो आगे इसकी और भी हे शान !
कुछ समझते इसको ही पहचान ,
जिधर जाओ एक ही नज़ारा हें !
इस कंपनी का मोबाइल हमारा हें ,
इसमें ये हें सुविधा यह हें खुबिया !
अपने के आगे नज़र आती सब में कमियां ,
इस से सिमट जाती ही दुरिया !
"मोबाइल " जिसके हाथ में हे देखो उसका स्टाइल ,
अब याद बन गयी चिठ्ठी -पत्र लगे दूर की बात !
छोटे -छोटे S M S से ही बन जाती बात ,
कुछ तो दीवाने इसमें ऐसे हुए मदहोश !
कानो से चिपका रहता लगे न कोई दोष ,
"मोबाइल " जिसके हाथ में हे देखो उसका स्टाइल ,
इसके दीवाने परवाह नहीं किसी बात की करते !
जेबे ढीली कर इसका बिल पे करते ,
घर थोडा सामान न ले जाये इस महंगाई में !
ज्यादा खर्चते मोबाइल की भरपाई में ,
"मोबाइल " जिसके हाथ में हे देखो उसका स्टाइल ,
दोस्तों यहाँ नहीं कोई अपवाद !
अगर कम से कम हो सवाद ,
हद से जयादा न करो उपयोग !
ज्यादा न करो पैसा बर्बाद ,
ऐसा दिन कभी न आये !
बिन मोबाइल के रहा न जाये !!!

ΞΞΞΞΞΞΞΞΞΞ´¨`':.ﻶﻉ.:' ´¨`ΞΞΞΞΞΞΞΞΞΞ

चित्र :- ( गूगल से साभार )


गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

"वैलेण्टाइन " क्या इसका साइन ..ॐ कश्यप


"वैलेण्टाइन " क्या आपने किया कभी माइन ,

यह क्या देता सन्देश क्या इसका साइन !
क्या इसका उपदेश कैसे चल पायेगा देश ,
छिप -छिप कर घर से निकल कर देते प्यार का सन्देश !!
छिपकर सन्देश देने वालो का यारो देखो होसला ,
ऐसे पर्व को मनाने से देश होगा खोखला !
अगर आपको दिखाना हे प्यार करना हे इज़हार -ऐ-मोहबत ,
तो करिए सभी खुदा से एक ही इबादत !
सब एक हे क्या धर्म क्या मजहब ,
सब अमन से रहे उसमे ही बसते हे सब !!
प्यार इश्क और मोहब्बत हे क्या कोई तो दे जवाब ,
गर्लफ्रेंड के आगे माँ- बाप, भाई-बहन, रिश्ते-नाते लगे एक खवाब !
चारो तरफ अब तो एक ही नज़ारा हे .
देखो इनकी नज़र में गर्लफ्रेंड ही सहारा हे !!
इनके लिए न उचित समय न उचित स्थान ,
नोज़वान तकते रहे बस एक ही निशान !
अजब इनकी चाहत हे दोस्तों गज़ब इनकी दास्तान ,
ऐसे दिनों का इंतज़ार करके कैसे बनेगा देश महान !!
वाह रे नोजवान .. वाह रे नोज़वान ....
याद करो सभी गवाही दे गावे ही वेद -पुराण ,
सब एक हे सब ही उसी की संतान !!

चित्र :- ( गूगल से साभार )

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

पतंग एक उड़ान .. ॐ कश्यप




पतंग एक उड़ान


पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग ,
एक डोर और हजारों रंग !
इसकी यादें आज भी हैं हमारे संग ,
बिखेरती आसमा में अपने रंग !!
पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग ,
इसकी चाहत नहीं देखती कीमत ,,
कभी दीवारें कूदी तो कभी मैदानों में दोड़े !
ऐसी थी बचपन की वो आदत ,
इसकी खूबसूरती आज भी देती हे दावत !!
पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग ,
न परवाह तेज धुप की ,
न भूखे पेट की लाज !
बस इनको आपस में लड़ाये ,
फिर भी नए दोस्त बनाये !!
आज भी बचपन को वो दिन याद आये ,
पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग ,
काश मेरी डोर भी हो किसी के हाथ ,
हम भी उड़ान भरे जज्बातों के साथ !
छुटे न कोई दोस्त ज़िन्दगी में ,
ऐसा हो हर किसी का साथ !!
पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग ,
कौन कहता हे कागज के फूलों में खुशबू नहीं होती !
पतंग भी तो कागज की ही होती ,
लकिन इसकी खुशबू आसमानों को छूती !!
एक डोर और हजारों रंग !
पतंग आज भी दिल में भरे हजारों उमंग !!
आप सभी को बसंत की बहुत बहुत शुभकामनाये


शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

यादें बन जाये सदा के लिए ............ॐ कश्यप





नीचे धरती ऊपर अम्बर ,
आ गया मेरा भी ब्लॉग में नंबर !
अब हम छुए आसमान ,
या सुने फ्लॉप- ऐ-फरमान !!
दिल में हे बस यही अरमान ,
हम सब छुए आसमान !
लिखूँ कुछ ऐसा आपके के लिए
कि यादें बन जाये सदा के लिए ,
मुझ पर रखना अपनी नज़र -ऐ -ख़ास !
कल कोई हो न हो ,
यादें रहे आपके पास !!
समझ नहीं आता दोस्तों ,
ब्लॉग का कैसे करू श्री गणेश !
संजय जी
और आप सब हे ,
हमारे गुरु जी और ब्रह्मा , विष्णु , महेश !!
यादें बन जाये सदा के लिए ,
बस यही हें एक सन्देश ,
बस यही हें एक सन्देश.....!!


♥♪♥**OM KASHYAP**♥♪♥